सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के अंतर्गत टेलीग्राम पर प्रतिबंध

पाठ्यक्रम: जीएस-2/ राजव्यवस्था &शासन 

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के अंतर्गत भारत में टेलीग्राम को अस्थायी रूप से अवरुद्ध कर दिया, क्योंकि आपराधिक नेटवर्कों ने NEET UG 2026 पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों के साथ धोखाधड़ी करने हेतु मंच की संदेश-संपादन सुविधा का दुरुपयोग किया था।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का परिचय

  • केंद्र सरकार अथवा उसके द्वारा विशेष रूप से अधिकृत कोई अधिकारी किसी सरकारी एजेंसी या मध्यस्थ को डिजिटल सूचना तक सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने का निर्देश दे सकता है।
  • इसके प्रयोग के आधार सीमित और स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं—भारत की संप्रभुता और अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, लोक व्यवस्था या संज्ञेय अपराधों के लिए उकसावे की रोकथाम।
  • श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद (2015) में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 69A को संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए इसे “कई सुरक्षा उपायों से युक्त एक संकीर्ण रूप से निर्मित प्रावधान” बताया था।
  • अवरोधन आदेशों को लागू करने से पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी (अवरोधन नियम), 2009 के अंतर्गत गठित अंतर-मंत्रालयी समिति की प्रक्रिया से गुजरना आवश्यक होता है।
  • धारा 69A वही प्रावधान है जिसके अंतर्गत जून 2020 में 59 चीनी अनुप्रयोगों, जिनमें, टिकटॉक,यूसी ब्रॉउजर और शेयर इट शामिल थे, पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस दृष्टि से टेलीग्राम पर लगाया गया अवरोध भारत द्वारा तब से अब तक उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत अनुप्रयोग-आधारित कदमों में से एक है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का महत्व

  • डिजिटल हस्ताक्षर: ऑनलाइन लेन-देन के प्रमाणीकरण हेतु असममित कूटलेखन प्रणाली आधारित डिजिटल हस्ताक्षरों के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है।
  • मध्यस्थ दायित्व और सुरक्षित आश्रय (धारा 79): मंचों को तृतीय-पक्ष सामग्री के लिए सीमित दायित्व से संरक्षण प्रदान करता है, बशर्ते वे यथोचित सावधानी बरतें और सरकारी निर्देशों का पालन करें।
  • साइबर अपराध और दंड: हैकिंग, पहचान की चोरी, स्रोत कोड से छेड़छाड़, डिजिटल धोखाधड़ी तथा डेटा गोपनीयता उल्लंघनों से संबंधित व्यापक दंडात्मक ढाँचा प्रदान करता है।
  • साइबर अपीलीय अधिकरण: प्रौद्योगिकी-संबंधी दीवानी विवादों तथा डेटा उल्लंघन मामलों के निपटारे हेतु प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराता है।

मुद्दे और चिंताएँ

  • अनुपातिकता की समस्या: इस अवरोध का प्रभाव भारत में टेलीग्राम के लगभग 15 करोड़ सामान्य उपयोगकर्ताओं पर पड़ा, जबकि मंच-स्तरीय कार्रवाई कुछ सीमित आपराधिक तत्वों द्वारा किए गए धोखाधड़ी कृत्यों के कारण की गई थी।
  • प्रवर्तन संबंधी कमियाँ: धारा 69A के आदेश इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार संचालकों को पहुँच अवरुद्ध करने का निर्देश देते हैं, किंतु विभिन्न सेवा प्रदाताओं द्वारा क्रियान्वयन में असमानता रहती है। साथ ही, VPN के माध्यम से ऐसे अवरोधों को आसानी से पार किया जा सकता है, जिससे उनकी प्रभावशीलता पर प्रश्न उठते हैं।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव: धारा 69A के अंतर्गत आदेश प्रायः संबंधित सामग्री या तर्कों के सार्वजनिक प्रकटीकरण के बिना जारी किए जाते हैं, जिससे न्यायिक समीक्षा और नागरिक समाज द्वारा निगरानी कठिन हो जाती है।

स्रोत: TH

 

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